Rishte Matlabi Shayari रिश्ते हमारे जीवन की सबसे मूलभूत और महत्वपूर्ण इकाई होते हैं। ये हमें समर्थन, प्रेम और अपनापन का एहसास कराते हैं। लेकिन जब यही रिश्ते मतलबी हो जाएं, तो इंसान का दिल टूट जाता है और वह भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाता है। ऐसे में लोग अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शायरी का सहारा लेते हैं। इस लेख में हम रिश्तों की मतलबपरस्ती पर आधारित कुछ गहरी शायरियों और उनके भावार्थ को समझने की कोशिश करेंगे।
मतलबी रिश्तों पर कुछ असरदार शायरियाँ
“मतलबी लोग और झूठे रिश्ते”

“कभी अपनों की भीड़ में खुद को तन्हा पाया है,
मतलब निकलते ही रिश्तों को टूटते देखा है।”
“झूठे रिश्तों का बोझ अब उठाया नहीं जाता,
हर कोई मतलब के लिए पास आता है।”
“जो दिल के सबसे करीब थे,
वही सबसे ज़्यादा तकलीफ दे गए।”
“मतलबी लोगों की इस दुनिया में,
सच्चे रिश्ते अब किताबों में ही मिलते हैं।”
“हर किसी को खुद से जोड़ लिया था दिल से,
पर उन्होंने सिर्फ मतलब के लिए हाथ थामा था।”
“वो रिश्ते भी क्या रिश्ते थे,
जो जरूरत के हिसाब से बदलते रहे।”
“हमने सोचा वो अपने हैं,
पर वो तो सिर्फ काम के लोग निकले।”
“झूठे रिश्तों की पहचान अब आसान हो गई है,
मतलब खत्म तो रिश्ता खत्म!“
“रिश्ते तो नाम के रह गए हैं,
सच्चाई तो अब चेहरों पर भी नहीं मिलती।”
“किसी का साथ मिला था साया बनकर,
और छोड़ गए अंधेरे में, मतलब निकलते ही।”
“अपनों से मिले धोखे”

“जिन्हें अपना समझा, उन्होंने ही पराया कर दिया,
जो दिल में थे, उन्होंने ही दिल तोड़ दिया।”
“अपनों से ही जब धोखा मिलता है,
तो गैरों पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है।”
“हमने अपनों के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया,
और उन्होंने हमें ही फालतू समझ लिया।”
“धोखा भी वही देते हैं जो सबसे करीब होते हैं,
वरना गैरों में इतनी हिम्मत नहीं होती।”
“अपनों की बातों ने ही सबसे ज्यादा दर्द दिया,
वरना ज़माना तो बस तमाशा देखता रहा।”
“कभी सोचा भी नहीं था कि
अपने ही इस तरह पराये हो जाएंगे।”
“चेहरे अपने थे, पर दिल किसी और के साथ था,
धोखा बस नाम का नहीं, एहसास का भी था।”
“जिसके लिए सब कुछ छोड़ा था,
उसी ने मुझे सबसे पीछे छोड़ दिया।“
“अपनों के धोखे ने वो ज़ख्म दिए,
जो वक्त के साथ भी नहीं भर पाए।”
“वो अपने थे इसलिए सह लिया धोखा,
वरना गैर होता तो हिसाब पूरा होता।”
मतलबी रिश्तों पर कुछ और शायरियाँ
रिश्तों की हकीकत

“अब रिश्ते भी मौसम की तरह हो गए हैं,
वक्त बदलते ही साथ भी बदल जाते हैं।”
“चेहरे पर मुस्कान और दिल में फरेब,
यही है आजकल के रिश्तों की हकीकत।”
“जो सामने हँसते हैं, वही पीछे वार करते हैं,
रिश्ते अब इतने झूठे क्यों हो गए हैं?”
“रिश्ते वो आइने हैं जो टूट जाएं तो जुड़ते नहीं,
और जुड़ भी जाएं तो दरारें छोड़ जाते हैं।”
“कभी हम भी खास थे किसी के लिए,
फिर यूँ ही वक्त के साथ आम हो गए।”
“रिश्ते निभाना अब दिल से नहीं,
मतलब से होता है।”
“रिश्तों में अब वो बात नहीं रही,
जो दिल से जुड़े थे, अब मतलब से जुड़े हैं।”
“कभी लगता था रिश्ते अनमोल होते हैं,
पर अब समझ आया वो सिर्फ बोल होते हैं।”
“रिश्ते आजकल डिजिटल हो गए हैं,
ऑनलाइन होते ही याद आते हैं।”
“कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं,
जो साथ तो होते हैं लेकिन पास नहीं।”
आईने की तरह रिश्ते

“रिश्ते भी अब आईने जैसे हो गए हैं,
पास जाओ तो टूटने का डर,
और दूर रहो तो धुंधला सा नज़र आता है।”
“आईने की तरह हो गए हैं अब रिश्ते,
सिर्फ दिखते हैं, निभते नहीं।”
“आईने में अब खुद को नहीं,
मतलब से जुड़े रिश्ते दिखाई देते हैं।”
“रिश्तों का भी क्या अजीब सच है,
जितनी साफ़ नज़र आती है, उतनी ही जल्दी टूट जाती है।”
“कभी रिश्ते आईने थे, सच्चाई दिखाते थे,
अब बस तस्वीरों की तरह दिखावे बन गए हैं।”
“रिश्ते आईने जैसे होते हैं,
अगर संभाल के न रखो तो टूट ही जाते हैं।”
“आईने की तरह ही होते हैं कुछ रिश्ते,
एक दरार लग जाए तो न चेहरा अच्छा लगता है, न रिश्ता।”
“आईना कभी झूठ नहीं बोलता,
इसलिए रिश्तों की असलियत उसमें जल्दी नज़र आती है।”
“रिश्तों को आईना कहने वाले भूल गए,
आईना भी ज़्यादा सच दिखाए तो तोड़ दिया जाता है।”
“आईने में चाहे कितनी भी खूबसूरती देखो,
अगर रिश्तों में दरार हो, तो सब बेकार लगता है।”
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निष्कर्ष:
Rishte Matlabi Shayari रिश्ते अगर सच्चे हों, तो जीवन सुखमय होता है। लेकिन जब वे मतलबी हो जाते हैं, तो केवल दर्द, धोखा और तन्हाई मिलती है। शायरी के माध्यम से हम अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं, अपने मन का बोझ हल्का कर सकते हैं, और आगे बढ़ने का रास्ता खोज सकते हैं।